CORONA ON AUTO MODE: शनिवार को पाबंदी में हर घंटे 1200 ऑटो ने रेलवे स्टेशन क्रॉस किया,

कोई बच्चे के दूध के लिए तो कोई बीवी को घुमाने के लिए ऑटो में निकला

रवि रौणखर, जालंधर

लॉक-डाउन मजाक नहीं है। जालंधर ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार को कोरोना वायरस ऑटो-मोड में डाल दिया था। पुलिस मूक दर्शक बनकर देखती रही और धड़ाधड़ ऑटो चलते रहे। इक्का दुक्का को कंपाउंड किया गया। मगर कुछ जरुरतमंद ऑटो रिक्शा चालक भी थे जिनके घर में चूल्हा नहीं जला होगा।
कोविड-19 के खतरे के बीच किसी ऑटोवाले को इसलिए गाड़ी चलानी पड़ी कि उसे अपने बेटे के लिए दूध खरीदना था, जो पिछले महीने ही इस दुनिया में आया है तो कोई अपनी पत्नी के दबाव में आकर रिश्तेदारों से मिलने जा रहा था। कहीं एक मजबूर पिता है तो कहीं एक बेबस पति। हर आपदा की आंच सबसे पहले गरीब तक ही पहुंचती है। मगर करोड़ों लोग जब अपने निजी हितों को भूलकर इस बंद(Locked down) में हिस्सा लेंगे तभी वायरस की कड़ी को तोड़ा जा सकता है। जब तक हम इस चेन को तोड़ न दें तबतक कोरोना को हराना मुमकिन नहीं है।

China won corona
चीन में अब मरीजों की गिनती कम होती जा रही है।

चीन पहले मरीजों के इलाज की ओर जा रहा था। उसे लगता था कि वह हर मरीज को ठीक कर लेगा। मगर जब देखा कि अस्पताल बनाने से नहीं मरीज घटाने से महामारी रुकेगी तो उसने लॉक-डाउन करना शुरू कर दिया। इस विषाणु को फैलने से रोका गया। आज चीन में मृतकों की संख्या 3255 और इटली में यह संख्या 5000 के पार चली गई है। चीन ने चेन तोड़ी लेकिन इटली लापरवाह रहा। लॉक डाउन से हम करोड़ों लोगों को आपस में मिलने से रोक लेते हैं। यही सबसे कारगर जरिया है मानव जाति को बचाने का। दुनिया में अभी तक 188 देशों के 306,892 लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। 13020 की मौत हो चुकी है।

एक घंटे में 600 ऑटो तो अकेले रेलवे स्टेशन को क्रॉस करता रहा

Corona in Punjab Locked Down Jal
इस फोटो में तीन ऑटो आपको दिखाए दे रहे होंगे।

कोरोना काल में लोग तरह तरह से अपनी और दूसरों की जान खतरे में डाल रहे हैं। सरकार ने शनिवार को सभी ऑटो रिक्शा बंद रखने के आदेश दिए थे। मगर रेलवे स्टेशन हो या बस स्टैंड। ऑटो सर्विस बाधित रही लेकिन बंद नहीं। दोमोरिया पुल फ्लाई ओवर से हर मिनट 10 ऑटो आ जा रहे थे।

यानी एक घंटे में 600 के करीब ऑटो रिक्शा रेलवे स्टेशन क्रॉस कर रहे थे। ऐसा ही कुछ हाल ज्योति चौक, कंपनी बाग होते हुए बस अड्डे को जाने वाले रास्ते का था। यहां भी ऑटो भर भर कर आ रहे थे। यानी शनिवार को सारे शहर की सड़कों पर कम से कम 2000 ऑटो चल रहा था। यह चिंता का विषय है।

एक ऑटो को पुलिस ने जब्त कर लिया तो उतारी गई सवारियां दूसरा ले गया

Locked down in Punjab
हाथ जोड़े खड़ा ऑटो चालक। पुलिस ने कोई दलील नहीं सुनी।

कंपनी बाग के बाहर पुलिस ने सवारियों से भरे एक ऑटो को हाथ देकर रोका। ऑटो रुका नहीं। ऐसे में एक पुलिस कर्मी ने स्कूटर पर पीछा करके ऑटो को रोका।

Locked down in Jalandhar Punjab 2
परिवार कहने लगा कि हम अस्पताल गए थे। मगर जब पुलिस ने पूछा कि दवा और पर्ची दिखाओ तो परिवार बोला रिश्तेदार के यहां आए थे। अब दीप सिंह नगर कैंट जाना है। मगर पुलिस ने ऑटो खाली करवा लिया।

सवारियों को उतर जाने के लिए कहा। ऑटो चालक का तुरंत चालान काटा गया। ऑटो चालक कह रहा था कि वह गरीब है और उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब है। वह पुलिस को साइड में जाकर बात करने के लिए भी कहने लगा। यानी कोरोना के काल में रिश्वत देने से भी लोग परहेज नहीं कर रहे। हालांकि पुलिसवाला अपनी ड्यूटी पर अड़ा रहा और ऑटो पुलिस लाइंस स्थित कम्पाउंड में जाकर खड़ा किया। हालांकि शहर के हर कोने पर इस तरह के पुलिस कर्मी तैनात नहीं थे जो तुरंत एक्शन ले रहे थे। जबकि कुछ इलाकों से पुलिस गायब थी।

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जैसे ही पुलिस ने इस ऑटो को जब्त किया तभी पीछे से दूसरा ऑटो आया और सवारियां बिठाकर चलता बना।

सोचा था कि चार पैसे कमा लूंगा, बेटे के लिए दूध लेकर जाना है

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पुलिस लाइन में ऑटो पार्क करता पवन कुमार

कोरोना के खौफ के बीच कुछ लोग अपने परिवार के लिए जान दांव पर लगा रहे हैं। 38 वर्षीय पवन कुमार के साथ भी कुछ ऐसा हुआ। पवन ने बताया कि वह संतोखपुरा में रहता है। एक महीने का बेटा है। सोचा था आज सवारी ज्यादा मिलेगी और रिस्क लेते हुए चार पैसे भी बन जाएंगे। उससे दूध लेने जाना था। एक अन्य ड्राइवर अपनी फटी कमीज दिखाता रहा लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। एक ऑटो में कम से कम 10 लोगों को बिठा लिया जाता है। सभी लगभग चिपके हुए 15 से 20 मिनट का सफर तय करते हैं। वायरस को फैलने के लिए इतना समय ही काफी है।

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