जालंधर का सबसे बड़ा प्राइवेट अस्पताल एक कोरोना मरीज का इलाज न कर पाया, अगर हजारों आए तो क्या करोगे?

अगर पहला मरीज ही ट्रीट नहीं हुआ तो हजारों कैसे संभालोगे?

रवि रौणखर, जालंधर

जालंधर के हालात बताने के लिए यही काफी है कि शहर का सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल एक कोरोना मरीज का इलाज न कर पाया। बेशक अस्पताल के पास वेंटिलेटर न हों लेकिन जरा सोचिए अगर मरीजों की संख्या दर्जनों होती हुई सैकड़ों फिर हजारों में पहुंची तो अपने दोआबा का क्या होगा?

पंजाब में पटेल अस्पताल का बड़ा नाम है। इलाज के लिए यह अकसर कई लोगों की पहली पसंद रहा है। पटेल अस्पताल के संस्थापक और सीनियर फिजिशियन डॉ. बीएस चोपड़ा ने साफ साफ कहा है कि उनके पास कोरोना के संदिग्ध मरीज को दाखिल करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे। डॉ. चोपड़ा का यह कहना कि अस्पताल में वेंटिलेटर खाली नहीं था इस बात की ओर भी इशारा करता है कि मरीज को सच में वेंटिलेटर की जरूरत थी। अगर हां तो सिविल अस्पताल ने उसे दाखिल क्यों नहीं किया। अगर सच में वेंटिलेटर की जरूरत नहीं थी तो पटेल अस्पताल के सीनियर फिजिशियन और शहर के वरिष्ठ मेडिकल स्पेशलिस्ट ने मरीज को दाखिल क्यों नहीं किया? अगले दिन मरीज की मौत यह भी साबित करती है कि उसकी तबीयत बिगड़ रही थी। इन सवालों के जवाब सेहत विभाग नहीं तलाश करेगा क्योंकि अभी तो होड़ इस बात में भी मची है कि किस जिले का केस किस अस्पताल जाएगा।

10 दिन के अंदर पंजाब का हेल्थ सिस्टम फेल हो सकता है

कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए सबसे पहले इसे पैलने से रोकना होगा। उसके लिए भीड़ न हो ऐसे इंतजाम करने होंगे। कुछ दशक पहले तक आई फ्लू आया करते थे। लगभग हर कोई उसकी चपेट में आ जाता था। यह कोरोना वायरस है। बहुत तेजी से फैलता है। शहर के एक नामी डॉक्टर का कहना है कि अगर लोगों ने इस वायरस को फैलने से नहीं रोका तो भारत का हेल्थ सिस्टम 10 दिन के भीतर ध्वस्त हो जाएगा। लोग सड़कों पर मरेंगे। इसलिए इस वायरस के खतरे को वुहान शहर के हिसाब से समझो। भीड़ जुटाओ।

एक अस्पताल ने संदिग्ध माना तो सिविल ने दाखिल क्यों नहीं किया?

corona virus in Punjab Trauma Center Jalandhar civil
ट्रामा सेंटर का ग्राउंड फ्लोर वीरवार को धोया गया। जिले के 22 लाख लोगों के लिए समझ लीजिए यही एक सेंटर है जहां दो फ्लोर हैं और दो ही स्टाफ नर्स उपलब्ध हैं।

नवांशहर के उस बुजुर्ग को जब पटेल अस्पताल लाया गया तब वह महज एक संदिग्ध मरीज था। यानी उसका टेस्ट नहीं हुआ था। मरीज को बीमारी के लक्षण आ चुके थे। ऐसे में पटेल की तो मजबूरी हो सकती है लेकिन सिविल अस्पताल ने मरीज को दाखिल क्यों नहीं किया?

एचआईवी, स्वाइन फ्लू मामलों में हदबंदी में उलझते रहे हैं सेहत अधिकारी

बेशक यह समय आलोचनाओं का नहीं है लेकिन इतिहास गवाह है कि जालंधर, नवांशहर, होशियारपुर और कपूरथला के जिला अस्पतालों के मरीज अकसर भटकते रहे हैं। मरीजों को गेंद की तरह एक पाले से दूसरे में भी फेंकने के कई किस्से हम रिपोर्ट कर चुके हैं। कई एचआईवी मरीज पहले ही शिकायतें कर चुके हैं कि एक अस्पताल कहता है कि आपका जिला दूसरा है आप वहीं इलाज करवाओ। इसी जिद के चलते एड्स से पीड़ित मरीज अपनी सर्जरी नहीं करवा पाए और कुछ की इलाज के अभाव से मौत हो गई। क्या इस मामले में ऐसा तो नहीं हुआ। नवांशहर का मरीज पटेल ने जब सिविल अस्पताल रेफर कर दिया तो उसे नवांशहर वापस क्यों भेजा गया? जिले का सेहत विभाग क्या सही हाथों में है? जिला अस्पताल के हालात तो ऐसे नहीं दिखते नीचे की घटना से आपको साफ हो जाएगाः

स्टाफ के पास पर्याप्त मास्क नहींः

सिविल सर्जन और जिला अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट चाहे कह रहे हैं कि हमारे पास मास्क या दवा की कोई कमी नहीं है लेकिन सिविल अस्पताल का स्टाफ बार बार कह रहा है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में मास्क और बाकी की किट नहीं मिल रहे। यहां तक की नर्सिंग स्टाफ ही दबी जुबान में कह रहा है कि वह खुद खरीदकर मास्क लेकर आ रहे हैं। अगर स्टाफ का यह आरोप सही है तो कोरोना को हराना पंजाब सेहत विभाग का काम नहीं है।

मेयर के साथ हेल्थ विभाग की मीटिंग बिना मास्क से

Corona in Punjb Health department without mask
मेयर की मीटिंग में किसी के मुंह पर मास्क नहीं।

सरकारी कर्मचारी आपातकाल में सबसे आगे रहते हैं। कोरोना का मुकाबला भी सेहत विभाग के डॉक्टर और स्टाफ कर रहा है। ऐसे में वीरवार को मेयर जगदीश राजा के साथ मीटिंग के दौरान किसी ने भी मास्क नहीं डाला था। हालांकि मास्क की जरुरत तब होती है जब किसी को खांसी या जुकाम हो रहा हो या फ्लू के लक्षण हों। लेकिन सेहत विभाग के कर्मचारी यह रिस्क भी नहीं ले सकते। वहीं जगदीश राजा भी 65 साल के हैं। उन्हें भी मीटिंग के दौरान थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए थी। मीटिंग में जागरुकता पोस्टर भी जारी किया गया। निगम और सेहत विभाग की टीमें मिलकर लोगों को जागरुक करेंगी कि वह कम से कम घर से बाहर निकलें और खांसी, छींकने के लिए रुमाल का इस्तेमाल करें। किसी में कोरोना के लक्षण हैं तो वह तुरंत नजदीगी सरकारी अस्पताल जाए।

शौच करने तो वार्डों में जाते हैं विजिटर

corona virus in Punjab Toilets closed visitors going to wards
कोरोना से लड़ना तो दूर यहां बाथरूम का ताला ही खुल जाए तो गनीमत है। यह बाथरुम कम से कम अस्पताल के वार्डों में होने वाले फुटफाल तो कम करेगा।

सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बुधवार को पॉजीटिव मरीज आकर जा चुका है। हवा में कोरोना वायरस ज्यादा देर नहीं रह सकता। मगर फर्श या स्टील पर यह अच्छा खासा टाइम निकाल लेता है। सेंटर के ग्राउंड फ्लोर को वीरवार शाम को धोया गया। उसे सेनिटाइज करने के बाद अभी फर्श गीला ही था कि बाहर से दो लोग दाखिल होते हैं। यह लोग एमरजेंसी में किसी मरीज के साथ आए थे। सिविल अस्पताल का आलम यह है कि वहां सभी पब्लिक टॉयलेट्स में दोपहर बाद ताले लग जाते हैं। ऐसे में विजिटर ट्रॉमा सेंटर जहां जिले का आइसोलेशन वार्ड है वहां जाने को मजबूर हैं।

2 thoughts on “जालंधर का सबसे बड़ा प्राइवेट अस्पताल एक कोरोना मरीज का इलाज न कर पाया, अगर हजारों आए तो क्या करोगे?

  • 22/03/2020 at 2:41 pm
    Permalink

    We really appreciate high light the facts.

    Reply
  • 25/03/2020 at 8:58 pm
    Permalink

    Make 500 baded Corona unit in isolated area and post spacial unit for care as done by china in wohan By our govt

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *