सबसे पहले कोरोना वायरस की चेतावनी देने वाले डॉक्टर की संक्रमण से मौत

चीन सरकार ने डॉ. ली के खिलाफ पुलिस जांच बिठा दी थी

रवि रौणखर, जालंधर

चीन में नोवल कोरोना वायरस से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब एक दुखद समाचार आया है कि सबसे पहले डॉक्टरों को कोरोना वायरस की जानकारी और चेतावनी देने वाले युवा डॉक्टर की वायरस संक्रमण से मौत हो गई है। चीन के सरकारी मीडिया चैनल गलोबल टाइम्स ने वीरवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि डॉ. ली वेनलियांग का दिल वीरवार रात 9ः30 बजे धड़कना बंद कर गया था।

Doctor died with coronavirus
डॉ. ली

यह वही डॉक्टर है जिसने दुनिया और चीन के अन्य डॉक्टरों को कोरोना वायरस के खतरे के बारे में सबसे पहले अगाह किया था। वुहान प्रांत से शुरू हुआ यह वायरस जब तेजी से फैल रहा था तब दुनिया को इसकी जानकारी नहीं थी। डॉ. ली उन आठ लोगों में शामिल थे जिन्होंने पूरे चीन के डॉक्टरों को चेतावनी देते हुए कहा था कि एक खतरनाक वायरस बेकाबू होकर लोगों को अपना शिकार बना रहा है। चीन में बोलने की आजादी नहीं है। वामपंथ के चलते वहां एक ही पार्टी का राज है। ऐसे में जो कोई भी किसी तरह की संजीदा जानकारियां दूसरों से बांटता है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है।

इसी वार्ड में डॉ. ली दाखिल थे। (फोटो ग्लोबल टाइम्स)

डॉ. ली के खिलाफ पुलिस जांच बिठा दी थी सरकार ने, प्रताड़ित भी किया गया

China Communist Party
चीन में लोकतंत्र नहीं है। जो फैसला वामपंथी पार्टी लेती है वही सर्वमान्य होता है।

जिस डॉक्टर ने लोगों को इस वायरस के खतरे से अगाह किया उसके खिलाफ चीनी सरकार ने पुलिस जांच बिठा दी थी। पुलिस अधिकारी डॉ. ली को लगातार प्रताड़ित भी कर रहे थे। उनके खिलाफ अफवाह फैलाने का मामला चल रहा था। मगर जानकारों का कहना है कि डॉ. ली कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के इलाज में लगे रहे। उन्होंने बाकी डॉक्टरों से कहा था कि अगर कोई नजला जुकाम, बुखार का मरीज इलाज के लिए आता है तो अच्छे से मास्क और दस्ताने पहनकर रखें। यह वायरस बेहद खतरनाक है।

महज 34 साल के इस युवा डॉक्टर ने मरने से पहले दुनिया को बता दिया था कि यह वायरस किस हद तक खतरनाक हो सकता है जबकि चीन की सरकार विश्व भर में अपनी किरकिरी से बचने के चक्कर में बातों को छिपाती रही। मगर अब यह वायरस 28 देशों में दाखिल हो चुका है। ऐसे में यह भी कहा जा सकता है कि डॉ. ली ने एक सच्चे डॉक्टर होने का फर्ज निभाते हुए अपनी जान कुर्बान की है।

ली ने कहा था कि सार्स जैसे जानलेवा वायरस से लोग पीड़ित हो रहे हैं

Wuhan makeshift hospital
वुहान में एक अस्पताल निर्माण में लगी दर्जनों क्रेन। यहां के अस्पतालों में बेड की किल्लत पैदा हो गई है। सड़कों पर ही मरीजों का इलाज चल रहा है। अस्पताल की क्षमता से कई गुणा ज्यादा मरीज आ रहे हैं।

डॉ. ली ने अपने मेडिकल कॉलेज के एलुमनाई ग्रुप (WeChat) में मैसेज डालकर कहा था कि सार्स {SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome)} जैसा एक खतरनाक वायरस वुहान में फैल रहा है। सार्स की चपेट में आने के बाद इंसान बहुत जल्दी मौत का ग्रास बन जाता है। डॉ. ली को भी इस वायरस के मरीजों में सार्स के लक्षण नजर आए थे। 2003 में जब सार्स दुनिया में फैला था तब भी चीन में 800 से ज्यादा लोग मारे गए थे। डॉ. ली ने अपने दोस्त डॉक्टरों से कहा था कि अपने परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों को कह दो कि बच कर रहें। यह वायरस खतरनाक है। मगर उनका मैसेज तेजी से चीन और दुनिया में वायरल हो गया और विश्व को जानकारी मिली कि चीन किस खतरे में घिर चुका है।

सरकार ने बाद में डॉ. ली से माफी मांगी

Sorry in China
हालांकि जब किरकिरी हुई तो चीनी प्रशासन ने डॉ. ली से माफी भी मांगी थी। डॉ. ली एक जिम्मेदार नागरिक और पेशेवर डॉक्टर का फर्ज निभाकर गए हैं।

डॉ. ली की बातें महज अफवाह नहीं थीं। 30 दिसंबर को ही उन्होंने एक मैसेज वायरल किया था जिसमें वह कह रहे थे कि यह वायरस खतरनाक है। सभी डॉक्टर फ्लू से बचने के लिए मास्क डालें। डॉ. ली ने अपना फर्ज निभाया था। सरकार अपनी अकड़ में उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई में पड़ गई। मगर धीरे धीरे जब हालात बेकाबू होने लगे तो सरकार की अकल ठिकाने आई। चीनी सरकार ने बाद में डॉ. ली से माफी मांगी। मगर वीरवार को वह डॉक्टर दुनिया छोड़ गया। अगर सरकार समय रहते डॉ. ली की बातों पर गौर करती और लोग जागरुक और स्तर्क हो जाते तो कई बेशकीमती जानें बच जातीं।

इंग्लैंड, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में फैलने लगा वायरस

6 फरवरी को एक ब्रिटिश नागरिक कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजीटिव पाया गया है। ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि उसे यह वायरस चीन से नहीं बल्कि किसी अन्य एशियाई देश से मिला है। जबकि जर्मनी के एक परिवार के सभी सदस्य इस वायरस से संक्रमित पाए गए हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया में भी एक महिला टेस्ट में पॉजीटिव पाई गई है।

Disinfection drive against Coronavirus
चीन में युद्ध स्तर पर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई चल रही है।

चीन के सरकारी आंकड़ों और अन्य एजेंसियों के हिसाब से 28093 मरीज सामने आ चुके हैं

देशकुल मरीजमौतेंकुल मरीज ठीक हुएसीरियस
चीन28,0935641,4063,859
जापान45   
सिंगापुर30 1 
थाईलैंड25 91
हांगकांग241  
दक्षिण कोरिया23 1 
ताइवान16 1 
ऑस्ट्रेलिया15 3 
मलेशिया14 1 
जर्मनी13   
अमेरिका12 1 
वियतनाम12 3 
मकाउ10   
फ्रांस6  1
यूएई5   
कैनेडा5   
फिलिपींस31  
यूके3   
भारत3   
रूस2   
इटली2  2
नेपाल1   
कंबोडिया1   
श्रीलंका1 1 
फिनलैंड1 1 
स्वीडन1   
बेल्जियम1   
स्पेन1   
 कुल28,3685661,4283,863

चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 3863 मरीज ऐसे हैं जो अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित होकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जबकि वीरवार तक 566 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

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