The X Factor: नेशनल हेल्थ मिशन अब आ रहा है काम, विदेश से आए एक एक व्यक्ति को ढूंढ रहे हैं ये माहिर

रवि रौणखर, जालंधर

बेहद कम सैलरी पर काम करने वाला नेशनल हेल्थ मिशन का स्टाफ आज पंजाब को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुका है। जालंधर के सिविल सर्जन दफ्तर में कंप्यूटर पर लिस्टों को खंगाल रहे इन कर्मचारियों को देख ठीक वैसा लग रहा था जैसा बोर्ड एग्जाम में आखिरी मिनट में छात्र महसूस करता है। अलर्ट, फोकस्ड और सवाल को हल करने का आत्मविश्वास। साथ ही एक डर भी है कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया। समय बीतता जा रहा है। जैसे जैसे विदेश से आए कोरोना संक्रमित यात्री पंजाब के कोने कोने से रिपोर्ट हो रहे हैं वैसे वैसे सेहत विभाग के कर्मचारी भी उन्हें आइसोलेट (अलग) करने के करीब पहुंच रहे हैं। हालांकि यात्री अभी कई कदम आगे हैं लेकिन उन्हें अलग थलग करने में सबसे अहम भूमिका आईडीएसपी और एनएचएम का स्टाफ निभा रहा है।

एनएचएम के पास कोरोना से लड़ने की काबलियत है, बस उन्हें स्पोर्ट करें

NHM fighting the CORONA in India

एनएचएम ने पहले भी अपनी काबलियत साबित की है लेकिन कोरोना जैसी चुनौती से इसका सामना पहली बार हुआ है। रिपोर्टिंग में माहिर एनएचएम के कर्मचारी बहुत तेजी से काम करते हैं। उन्हें गांव गांव कूचे कूचे की जानकारी होती है। उनका नेटवर्क बहुत कारगर होता है। आशा वर्कर की फौज अगर एनएचएम के स्टाफ के साथ पूरी मुस्तैदी से काम करे तो बहुत जल्दी विदेश से आए प्रत्येक व्यक्ति को कवैरन्टीन में रखा जा सकता है। इसमें पंजाब पुलिस के जांबांजों की भी अहम भूमिका रहेगी। हालांकि अब विदेश से आकर जगह जगह भाग रहे लोगों की अकल ठिकाने आ गई होगी कि उनकी वजह से पूरा पंजाब खतरे में आ गया है।

सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदर चावला,एसएमओ डॉ. सुरेंद्र कुमार, एसएमओ डॉ. रमन शर्मा, एपिडमोलोजिस्ट डॉ. सतीश कुमार और एपिडमोलोजिस्ट डॉ. शोभना बंसल के नेतृत्व में चल रहा काम

महामारी से लड़ना सेहत विभाग का काम है। यह काम वह 100 सालों से कर रहा है। कोरोना जैसी भयानक महामारी से लड़ने के लिए जालंधर की सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदर चावला, एसएमओ डॉ. रमन शर्मा, एसएमओ डॉ. सुरेंद्र कुमार, एपिडमोलोजिस्ट डॉ. सतीश कुमार और एपिडमोलोजिस्ट डॉ. शोभना बंसल, एनालिस्ट विजय की टीम अहम भूमिका निभा रही है। सेहत विभाग के ज्यादातर विभाग इस युद्ध में एकजुट हो चुके हैं। मगर सारी नजरें एनएचएम के स्टाफ पर हैं। विदेश यात्रा करके आए लगभग 12000 लोगों को ढूंढना आसान नहीं है।

ट्रॉमा सेंटर में काम कर रहा स्टाफ सबसे ज्यादा जोखिम उठा रहा

Corona Trauma staff at risk
संदिग्ध मरीज का चैकअप करते ट्रामा के डॉक्टर व स्टाफ। मरीज को सांस लेने में तक्लीफ थी। अब देखिए सबसे ज्यादा रिस्क किसे है? (डॉक्टर पीठ पर स्टेथोस्कोप से महिला के फेफड़ों की जांच करते हुए)

सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर को पूरी तरह से फ्लू कॉर्नर और आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। यहां शनिवार को 100 से ज्यादा लोग चैकअप के लिए आए थे। रविवार को भी चैकअप जारी है। ऐसे में सबसे ज्यादा जोखिम ट्रामा में काम करने वाला स्टाफ उठा रहा है। हालांकि हैरानी की बात यह है कि यहां काम करने वाली ज्यादातर नर्सें महज 10-12 हजार में काम कर रही हैं जबकि उन्हीं के बराबर सीनियोरिटी वाले रेगुलर स्टाफ को 60 हजार के करीब सैलरी मिल रही है।

Trauma Jalandhar
ट्रामा सेंटर।

यहां का स्टाफ सबसे ज्यादा रिस्क उठा रहा है। कोरोना संदिग्ध मरीजों का चैकअप हो या उनके मुंह और नाक से सैंपल (स्वैब) लेना। यह स्टाफ सबसे ज्यादा रिस्क उठा रहा है। सुनने में यह भी आया है कि उनके पास सामान की कमी है लेकिन एसएमओ डॉ. शर्मा का कहना है कि किसी भी चीज की अब कमी नहीं है। वेरका से दवा का भंडार पहुंच चुका है। मास्क और सेनिटाइजर भी आ गए हैं। पॉजीटिव मरीज के इलाज के लिए जरूरी पीपीई किटें भी पहुंच चुकी हैं।

डीसी वीके शर्मा और सिविल सर्जन के नेतृत्व में हम पूरी तरह तैयार हैं। सिविल के डॉक्टर और नर्स सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। जो लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे थे उनमें से भी कई डॉक्टर वापस काम पर आ गए हैं। हालांकि कुछ को सिस्टम से शिकायतें हैं लेकिन फिर भी अब सिविल में एक अच्छी टीम बनती दिख रही है।

ऐसे तमाम कोरोना आएंगे, सामना करना है तो एनएचएम की ताकत बढ़ानी होगी

NHM in Punjab

हम हॉलीवुड फिल्मों ही ऐसे सीन देखते थे। आज सच में लोग घबराए हुए हैं। अभी तक तो कोरोना को एक एक्सीडेंट माना जा रहा है। अगर कल को किसी दुश्मन ने इससे भी भयंकर जैविक हथियार बना लिया तो? उस वक्त गोला बारूद से कहीं ज्यादा ताकतवर होगा हेल्थ नेटवर्क। उन नेटवर्क को संभालेंगे एनएचएम के कर्मचारी।

10000 रुपए महीना में कोरोना को हराने वाले सिपाही नहीं मिल सकते

कोरोना पर विजय हासिल करने के बाद भारत सरकार को सबसे पहले एनएचएम कर्मचारियों को रेगुलर करके उन्हें सम्मानजनक सैलरी देनी चाहिए। अब वक्त आ गया है कि हम भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए अपने हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाएं। 10000 रुपए महीना सैलरी से आप एक कुशल कर्मचारी की कल्पना नहीं कर सकते जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस का मुकाबला करना है।

5 thoughts on “The X Factor: नेशनल हेल्थ मिशन अब आ रहा है काम, विदेश से आए एक एक व्यक्ति को ढूंढ रहे हैं ये माहिर

  • 22/03/2020 at 8:02 pm
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    Great job done by sir. Have they get credit form our government. Or all credit take by our politicians

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