इंसानियत शर्मसारः 108 ने फोन नहीं उठाया, प्राइवेट एंबुलेंस वाला नहीं माना, मरीज की मौत के बाद मोहल्ले से कंधा देने भी कोई नहीं आया

मुश्किल से 5 रिश्तेदार आए और महिला का संस्कार किया

रवि रौणखर, जालंधर

कोरोना वायरस के डर से लोग इंसानियत भूल रहे हैं। कोरोना से आने से पहले इंसान अमर नहीं था। हार्ट, किडनी, फेफड़े और लीवर रोग से भी मौतें होती हैं। सुराज गंज के संजीव भल्ला की पत्नी सपना भल्ला की बुधवार सुबह 5ः30 बजे तबीयत खराब हो गई। भल्ला ने पड़ोस में रहने वाले डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने मरीज की हालत देखकर उसे किसी बड़े अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। परिवार 108 एंबुलेंस को फोन करता रहा लेकिन किसी ने नहीं उठाया। घर के पास स्थित सिविल अस्पताल गया लेकिन वहां भी कोई एंबुलेंस नहीं मिली। पड़ोस के एक ऑटोवाले के पास गए कोई मदद नहीं मिली। जिन पड़ोसियों के पास कार थी उन्होंने भी कह दिया कि कर्फ्यू में हम फंस जाएंगे। सपना भल्ला ने 9 बजे दम तोड़ दिया। पार्थिव शरीर को शमशान घाट ले जाने के लिए भी कोई पड़ोसी आगे नहीं आया। यह सिर्फ कोरोना का डर नहीं बल्कि आज के मानव का असल चरित्र है।

शमशान घाट में 5 लोग मुश्किल से जुट पाए

woman died in wait of ambulance

हरनामदास पुरा शमशान घाट में लाल जोड़े में सपना भल्ला के पार्थिव शरीर को लाया गया। संजीव के अलावा अर्थी को कंधा देने के लिए मुश्किल से 5 लोग जुट पाए थे। हर कोई गुस्से में था कि एक के बाद एक हर जगह इंसानियत मृत नजर आई।

woman died in wait of 108 ambulance
संजीव भल्ला

फिजियोथैरापी सेंटर में काम करने वाले संजीव ने बताया कि जब मैं मोहल्ले के एक ऑटोवाले के पास गया तो उसने कहा पहले मेरे ऑटो के आगे और पीछे लगी गाड़ियों को हटवा दो। जबतक गाड़ियां नहीं हटतीं मैं बाहर नहीं आउंगा। संजीव ने बताया कि जब पहले गाड़ियां लगी होती थीं तब ऑटोवाला खुद उन्हें हटवा देता था। कार वाले घरों से भी निराशा मिली।

डॉक्टर साहब 3 बार आए

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परिवार का कहना था इस दुख की घड़ी में सिर्फ पास के एक डॉक्टर हमारे काम आए। उन्होंने तीन बार आकर मरीज का चैकअप किया। मगर दूसरा कोई भी हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया। इंसानियत रही ही नहीं है। जबकि प्रशासन ने संस्कार के लिए आने जाने वालों पर कोई रोक नहीं लगा रखी है।

पंजाब की ज्यादातर 108 एंबुलेंस आज खाली रहीं

108 Ambulance
एमरजेंसी 108 नंबर एंबुलेंस

108 एंबुलेंस चलाने वाले कई ड्राइवर और ऑप्रेटर बुधवार को दिन भर कंट्रोल रूम से कॉल आने का इंतजार करते रहे। एक जानकार ने बताया कि 108 एंबुलेंस वालों के पास पीपीई किटें नहीं हैं। अगर वह किसी कोरोना पॉजीटिव मरीज को संदिग्ध समझकर भी अस्पताल लाते हैं तो उसकी टेस्ट रिपोर्ट दो दिन बाद आती है। ऐसे में कौन सा मरीज संक्रमित है और कौन सा नहीं है यह पता तो बाद में लगेगा। इसलिए किसी भी तरह के मरीज को लिफ्ट करने के लिए प्रत्येक एंबुलेंस में 10 से 12 पीपीई किटें हर वक्त मौजूद होनी चाहिए।

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