महामारी के बीच शहर के सबसे सीनियर ऑर्थो सर्जन डॉ. मांगट नहीं रहे, कर्फ्यू तोड़ने वाले उनके संस्कार से सीख लें

हड्डियों के कई डॉक्टर उनसे सीखकर बड़े बने

रवि रौणखर, जालंधर

महामारी के बीच एक उमदा डॉक्टर शहर को छोड़ गया। जन्म कीनिया में हुआ। पढ़ाई लंदन में। मगर जिंदगी हिंदुस्तान को दी। जालंधर पहुंचे तो हड्डियों का पहला अस्पताल खोला। कचहरी के सामने मांगट अस्पताल के सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जीएस मांगट नहीं रहे। सोमवार को उनका निधन हो गया। वह 85 साल के थे।

उनके बेटे डॉ. संजीत मांगट ने पिता को मुखाग्नि दी। संस्कार पर उनकी पत्नी डॉ. स्वर्ण कौर मांगट और चंद रिश्तेदार व दोस्त ही मौजूद थे। अपने सीनियर मोस्ट ओर्थोपेडिक सर्जन को श्रद्धांजलि देने के लिए जालंधर ओर्थोपेडिक सोसाइटी के कुछ हड्डियों के डॉक्टर भी मौजूद थे।

उनके पिता कीनिया में बिजनेसमैन थे। कीनिया में बसे एशियाई मूल के प्रवासियों से बिजनेस करने के अधिकार छीन लिए गए तो वहां के भारतीयों के पास पलायन के सिवा कोई दूसरा रास्ता न बचा था। डॉ. मांगट के पिता ने इंग्लैंड जाने का फैसला किया। तीन पीढ़ियों से कीनिया में रहा मांगट परिवार अपना बना बनाया कारोबार कीनिया में छोड़कर अब यूके में बस चुका था। डॉ. मांगट ने वहां ऑर्थोपेडिक्स में एफआरसीएस किया और 1972 में अपने वतन भारत लौट आए। यहां उन्होंने ऑर्थोपेडिक्स में प्राइवेट प्रेक्टिस शुरू की। उस वक्त सिविल अस्पताल में डॉ. शिंगारा बतौर सर्जन हड्डियों के केस भी देखा करते थे। मगर डॉ. मांगट शहर के पहले ऑर्थो स्पेशलिस्ट थे।

जो कर्फ्यू तोड़, बाहर निकल रहे हैं उन्हें इस संस्कार से सीख लेनी चाहिए

Dr GS Mangat ortho no more
गिनकर 20 के करीब लोग ही संस्कार में बुलाए गए थे।

यह संस्कार एक तरह से उन लोगों के लिए सीख की तरह था जो कोरोना वायरस की आपदा के वक्त बेवजह घरों से बाहर निकल रहे हैं। मेडिकल जगत में डॉ. मांगट कोई छोटी हस्ति नहीं थे। आज अगर कोरोना वायरस न होता तो मॉडल टाउन शमशानघाट में तिल फेंकने की जगह न मिलती। उनके आखिरी दर्शनों के लिए पूरी डॉक्टर बिरादरी व चाहने वाले यहां होते। मांगट परिवार की भी सराहना करनी होगी जिन्होंने बड़ी विनम्रता से लिखा कि मोबाइल पर ही शोक व्यक्त करें।

शहर ने मोबाइल पर ही डॉ. मांगट को श्रद्धांजलि दी

Dr Mangat honoured by Dr Mukesh
डॉ. मांगट को सम्मानित करते पूर्व आईएमए प्रधान डॉ. मुकेश गुप्ता एवं डॉ. डीआर शर्मा
कोरोना को गंभीरता से न लेने वालों को यह मैसेज पढ़ना चाहिए।

जब उनकी मृत्यू की खबर का मैसेज मेडिकल जगत और जान पहचान के लोगों को भेजा गया तो नीचे लिखा था, आप मोबाइल से ही श्रधांजलि भेजें। उनकी पत्नी डॉ. स्वर्ण और बेटे डॉ. संजीत के मोबाइल पर कॉल और मैसेज आने लगे। बहुत सारे डॉक्टरों को मलाल भी रहा कि वह संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। कुछ ने डॉ. मांगट के साथ अपनी पुरानी तस्वीरें शेयर कीं।

डॉ. मांगट ने ब्रेडरथ रोड और सेंट्रल टाउन में भी कई साल प्रेक्टिस की – डॉ. वीके वासुदेव (सीनियर सर्जन, लाजवंती)

कुछ समय से बीमार चल रहे थे

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पिछले कुछ समय से वह बीमार चल रहे थे। परिवारिक मित्र डॉ. आलोक लालवानी ने बताया कि उनके पिता डॉ. जीएल लालवानी और डॉ. मांगट अच्छे दोस्त थे। हमारा अकसर डॉ. मांगट से मिलना होता था। वह हमेशा हंसते और दूसरों को हंसाते रहते थे।

वह टिपिकल ब्रिटिश डॉक्टर थे, उनका ओटी देखने लायक था- डॉ. पसरीचा

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डॉ. राजेश पसरीचा, सेक्रेटरी गुलाब देवी अस्पताल ट्रस्ट

सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. राजेश पसरीचा ने बताया कि ” मुझे एक बार डॉ. मांगट के ऑप्रेशन थियेटर जाने का मौका मिला था। उनका ओटी देखकर मैं दंग रह गया था। वैसा ओटी आज भी कहीं मिलना मुश्किल होगा। वह जब सर्जरी करते थे तो जहां दो असिस्टेंट चाहिए होते थे वह चार रखते। जहां एक सर्जिकल वस्तु की जरूरत होती वह तीन रखते थे। अपने मरीजों से वह बहुत प्यार करते थे। उन जैसे नैतिकता वाले डॉक्टर बहुत कम होते हैं।

बहुत मेथोडिक सर्जन थे- डॉ. बौरी

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डॉ. चंदर बौरी

सीनियर फिजिशियन डॉ. चंदर बौरी ने बताया कि डॉ. मांगट बहुत ही प्रोफेशनल और मेथोडिक सर्जन थे। बहुत ही मृदु भाषी थे। पिछले 5 साल तक वह प्रेक्टिस करते रहे।

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डॉ. अजरावत

मौके पर सीनियर ऑर्थो सर्जन डॉ. एसएस अजरावत ने बताया कि उन्होंने लगभग डेढ़ दशक तक डॉ. मांगट के साथ काम किया। बहुत कुछ सीखने को मिला। गार्डियन अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संजीव गोयल ने बताया कि ऑर्थोपेडिक्स की लेटेस्ट तकनीक सबसे पहले डॉ. मांगट के पास आती थी। वह खुद को बहुत अपडेट रखते थे। आज की पीढ़ी के बहुत सारे ऑर्थो सर्जन उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे हैं। मौके पर सीनियर ऑर्थो सर्जन डॉ. डांग, अर्बन एस्टेट स्थित गुरुद्वारा श्री सिंह सभा के प्रधान जेएस राय, डॉ. सतपाल मौजूद रहे।

2 thoughts on “महामारी के बीच शहर के सबसे सीनियर ऑर्थो सर्जन डॉ. मांगट नहीं रहे, कर्फ्यू तोड़ने वाले उनके संस्कार से सीख लें

  • 25/03/2020 at 3:50 pm
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    Dr Mangat was very encouraging and jovial, Dr Kohli an orthopedic surgeon belongs to Jalandhar, now settled in Yamunanagar has sweet memories of him .’ He clicked our pic at Calcutta conference in 1985′

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