अब AI बताएगी मरीज को दवा से फायदा होगा या नहीं

आईएमए की दूसरी क्लीनिकल मीटिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बात हुई

एनएचएस अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने कुल 8 लेक्चर दिए

रवि रौणखर, जालंधर

जालंधर को यूं ही मेडिकल सिटी नहीं कहा जाता। यहां के डॉक्टरों ने समय समय पर देश भर में अपनी काबलियत का डंका बजाया है। अब जालंधर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। बड़ी तेजी से उभर रहे एनएचएस (NHS) अस्पताल में इस तकनीक के इस्तेमाल से मरीजों का बेहद सटीकता के साथ इलाज हो रहा है। डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की दूसरी क्लीनिकल मीटिंग में एनएचएस अस्पताल के 8 विभागों के सुपर स्पेशलिस्ट अपनी अपनी प्रेजेंटेशन देने के लिए होटल रीजेंट पार्क पहुंचे थे। तीन डॉक्टरों की प्रेजेंटेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जिक्र हुआ। डॉक्टरों का कहना था कि एआई ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के माहिर से माहिर डॉक्टर का निर्णय भी एआई की बराबरी नहीं कर सकता। यानी मरीज को किस ऑप्रेशन या किस इलाज की जरूरत है उसे तय करने में एआई अहम भूमिका निभा सकती है। वह यह भी बता सकती है कि क्या मरीज को फलां बीमारी होने का खतरा है? क्या इस ट्रीटमेंट से मरीज को फायदा पहुंचेगा? मरीज को सर्जरी से लाभ होगा या दवा से काम चल जाएगा। एआई भविष्यवाणी भी करेगी और डॉक्टरों को इलाज का सटीक रास्ता चुनने में भी सहायक सिद्ध होगी। एआई कंप्यूटर साइंस की मदद से तैयार उस प्रोग्राम को कहते हैं जो दुनिया भर में मौजूद ज्ञान को संजोकर एक मशीन से इंसान जैसा काम लेने की क्षमता रखता है। यह रोबोट भी हो सकता है या किसी अस्पताल की एमआरआई मशीन से जुड़ा कोई कंप्यूटर जो यहां तक बता सकता है कि फलां मरीज सर्जरी के बाद कितने दिन में ठीक हो सकता है।

Artificial intelligence (AI) is an area of computer science that emphasizes the creation of intelligent machines that work and react like humans.

स्पाइन सर्जरी के रिजल्ट पहले ही भांप सकते हैं – डॉ. चितकारा

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स्पाइन एंड न्यूरो सर्जन डॉ. नवीन चितकारा ने बताया कि एआई से हम मरीज की स्पाइन सर्जरी से पहले उसकी एमआरआई और बाकी टेस्ट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से यह पता लगा सकते हैं कि उसे किस तरह की सर्जरी की जरूरत है और उसके रिजल्ट क्या होंगे। कई बार ऐसे नतीजे भी सामने आ जाते हैं जो बड़े से बड़ा माहिर भी नहीं सोच सकता। इसके लिए अधिक से अधिक डाटा की जरूरत होती है। एआई मरीज के सारे पैरामीटर चैक करके सर्जन का काम आसान कर देती है।

एआई मरीज का आर्थिक बोझ कम करेगी- डॉ. गरिमा उप्पल

डॉ. गरिमा उप्पल

एनएचएस अस्पताल की न्यूरो रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा उप्पल ने अपने लेक्चर में बताया कि जैसे ही मरीज स्ट्रोक के बाद अस्पताल आता है तब न्यूरोलॉजिस्ट को सीटी या एमआरआई का इंतजार रहता है। उसके बाद ही वह दिमाग की नस में ब्लॉकेज का जायजा और आगे का इलाज शुरू करता है। यहीं एआई अपना काम करती है। उसकी मदद से एक रेडियोलॉजिस्ट यह तक बता सकता है कि क्या मरीज को क्लॉट हटाने वाला हजारों रुपए का टीका लगाने का फायदा है या नहीं। बहुत सारे मामलों में मरीज को टीका लगाने के बाद भी वह ठीक नहीं हो पाता है। हजारों खर्च भी हो जाते हैं और दवा के साइड इफेक्ट भी उसके शरीर को झेलने पड़ते हैं। एआई से ऐसे मरीजों का बोझ कम होगा।

रोबोट की मदद से घुटने के जोड़ बदलने में स्टीक परिणाम आ रहे- डॉ. शुभांग

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डॉ. शुभांग अग्रवाल रोबोटिक सर्जरी के बारे में बताते हुए।

सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शुभांग अग्रवाल ने एआई की मदद से घुटने बदलने में मिल रही कामयाबी पर लेक्चर दिया। उन्होंने बताया कि रोबोट की मदद से हम मरीज के घुटने बदलते वक्त मौके पर ही चैक कर लेते हैं कि उसके जोड़ की मूवमेंट कैसी है। क्या उसका जोड़ सही से फिट हो चुका है। सर्जन जितना भी काबिल हो लेकिन मानवीय त्रुटि रोकना मुश्किल है। ऐसे में रोबोट की मदद से घुटना बदलते वक्त उसी त्रुटि (Human Error) से बचा जा सकता है।

NHS HOSPITAL JALANDHAR DR SHUBHANG AGGARWAL JOINT
घुटने का खराब हिस्सा बदलकर बाकी के स्वस्थ हिस्से को बचाया जा सकता है- डॉ. अग्रवाल

यही नहीं अब घुटने का आधा हिस्सा भी बदला जा रहा है। हाफ नी रिप्लेसमेंट के चलते मरीज के घुटने का स्वस्थ हिस्सा बचा लिया जाता है जिससे उसकी जिंदगी आसान और शरीर पर कम बोझ पड़ता है। एआई से मेडिकल जगत में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं। जिसका सीधा फायदा मरीजों को हो रहा है।

मौके पर चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. विनीत महाजन ने कोरोना वायरस के बारे में जानकारी दी। डॉ. महाजन ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों को अगले एक दो महीने तक विदेश यात्रा न करने की सलाह दी।

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यूरोलोजिस्ट डॉ. सतिंदरपाल अग्रवाल ने लेजर से पथरी निकालने वाली तकनीक की जानकारी दी

एनएचएस के यूरोलोजिस्ट डॉ. सतिंदरपाल अग्रवाल ने बताया कि लेजर तकनीक से बिना चीरा लगाए ही हम गुर्दे की पथरी को तोड़कर बाहर निकाल सकते हैं। इससे मरीज जल्द घर वापस चला जाता है और किसी तरह के चीरे से भी शरीर बच जाता है।

डॉ. संदीप गोयल

सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संदीप गोयल ने ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी को ब्रेन स्ट्रोक होता है उसकी पहली दवा तो समय ही है। यानी समय रहते अगर उसे न्यूरोलॉजिस्ट तक पहुंचा दिया जाए तो उसके सामान्य होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

NHS Hospital TEAM IMA JALANDHARPOST
एनएचएस अस्पताल की टीम

अस्पताल की गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट डॉ. दीपिका परमार ने बताया कि किस तरह से एंडोस्कोप की मदद से पेट में होने वाली ब्लीडिंग को समय पर रोका जा सकता है। डॉ. परमार ने यह भी बताया कि अब एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड की मदद से पेट की बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आ चुके हैं। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुजीत ने दिल के इलाज में किन बातों का ध्यान रखा जाए और क्या किया और क्या न किया जाए विषय पर लेक्चर दिया।

असिस्टेंट सिविल सर्जन डॉ. गुरमीत कौर दुग्गल, डॉ. सुषमा चावला, डॉ. अमिता शर्मा ने इस सेशन की अध्यक्षता की।

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बाएं से न्यूरो सर्जन डॉ. नवीन चितकारा, न्यूरो रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा उप्पल, गायनीकॉलोजिस्ट डॉ. अमिता शर्मा और डॉ. सुषमा चावला।

यहां आईएमए के पंजाब प्रधान डॉ. नवजोत दहिया, जालंधर प्रधान डॉ. पंकज पॉल, सेक्रेटरी डॉ. अशमीत सिंह, फाइनांस सेक्रेटरी डॉ. मुनीष सिंघल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डॉ. दीपक चावला, डॉ. विजय महाजन, डॉ. वीपी शर्मा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. एसपीएस सूच, डॉ. योगेश्वर सूद, डॉ. राकेश विग, डॉ. निपुन महाजन, डॉ. निखार महाजन,  डॉ. नरेश बाठला, डॉ. डिंपल शर्मा, डॉ. दीपाली लूथरा, डॉ. ज्योति सूद, डॉ. अर्पना चोढा, डॉ. गोमती महाजन, डब्ल्यूडीडब्ल्यू की पंजाब प्रधान डॉ. जैसमीन दहिया मौजूद रहे।

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