COVID-19 First Death: पटेल अस्पताल से इलाज नहीं हुआ, सिविल ने मरीज दाखिल नहीं किया, कोरोना के पहले मरीज ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया!

यह वायरस दुनिया भर के 178 देशों में 244364 लोगों के शरीर में दाखिल हो चुका है। 10007 की जान जा चुकी है।

सवाल छोड़ती है कोरोना से हुई पहली मौत?

रवि रौणखर, जालंधर

पंजाब में कोरोना से पहली मौत में सेहत विभाग की एक बड़ी लापरवाही नजर आ रही है। मरीज तीन तीन अस्पतालों तक पहुंचा लेकिन किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। इसमें एक प्राइवेट और दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं। वहीं फगवाड़ा में इंग्लैंड से लौटे एक 63 वर्षीय बुजुर्ग ने भी अल्प बीमारी के बाद दम तोड़ दिया। हालांकि अभी तक उनकी टेस्ट रिपोर्ट नहीं आई है। कपूरथला सिविल सर्जन दफ्तर भी उस मौत का कारण कोरोना वायरस नहीं मानता। वहीं पंजाब के रहने वाले ऑस्ट्रेलिया से आए एक नौजवान ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल की 7वीं बिल्डिंग से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। उसे शक था कि वह कोरोना मरीज है। आत्महत्या करने वाले को सिर्फ शक था कि वह कोरोना पॉजीटिव हो सकता है। उसी डर से उसने आत्महत्या कर ली। मगर जालंधर में अस्पताल क्यों डर रहे हैं।

12 दिन पहले जर्मनी से इटली होते हुए 75 वर्षीय बुजुर्ग बलदेव सिंह की 18 मार्च को मौत हो गई। उसी दिन संस्कार कर दिया। संस्कार में शामिल लोगों के भी सैंपल लिए गए हैं। बुजुर्ग 7 मार्च को इटली होते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा था। वहां से उसे नवांशहर के गढ़शंकर रोड स्थित पठालावा गांव लाया गया। सेहत विभाग का दावा है कि बुजुर्ग को परिवार ने पहले ही आइसोलेशन में रखा था। मगर जब बुजुर्ग की हालत बिगड़ने लगी तो परिवार उसे पटेल अस्पताल जालंधर ले गया। पटेल इलाज नहीं कर पाया तो उसे सिविल अस्पताल जालंधर रेफर कर दिया गया। सिविल के डॉक्टरों को मरीज में लक्ष्ण नजर नहीं आए या मरीज ने घर जाने की जिद की। यह जांच का विषय है। मगर मरीज दो बड़े बड़े अस्पतालों में होता हुआ फिर घर जाने को मजबूर हुआ और वहीं उसकी मौत हो गई। हालांकि सेहत विभाग ने मरीज का सैंपल ले लिया था।

हमारे पास वेंटिलेटर नहीं था, इसलिए सिविल रेफर कर दिया- पटेल अस्पताल

Dr BS Chopra Patel Hospital Corona in Punjab
पटेल अस्पताल के सीनियर फिजिशियन और डायरेक्टर डॉ. बीएस चोपड़ा

पटेल अस्पताल के पास मरीज के इलाज के बंदोबस्त नहीं थे। ऐसे में इलाज करने में असमर्थ अस्पताल ने मरीज को सिविल अस्पताल जालंधर रेफर कर दिया। अस्पताल के मेडिकल स्पेशलिस्ट और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. बीएस चोपड़ा ने बताया कि हमारे पास वेंटिलेटर नहीं था। ऐसे में हम मरीज को दाखिल कैसे कर लेते। मरीज में कोरोना के लक्षण थे इसलिए हमने उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। अब आगे सिविल अस्पताल ने मरीज का इलाज किया या नहीं उस पर मैं कमेंट नहीं कर सकता। मगर हमारे पास वेंटिलेटर खाली नहीं था। वैसे भी यह इस सीजन का हमारे पास आया पहला कोरोना संदिग्ध मरीज था।

जहां मरीज को कुछ घंटे रखा गया था उसे सेनीटाइज किया गया है

पटेल अस्पताल के डॉ. चोपड़ा ने बताया कि जहां मरीज को रखा गया था उस जगह को पूरी तरह से सेनीटाइज कर दिया गया है। यह रूटीन प्रोटोकोल है।

सिविल अस्पताल के डॉक्टरों को लक्ष्ण नजर नहीं आए

Trauma Jalandhar
इस ट्रामा सेंटर मरीज बुधवार को लाया गया था

सेहत विभाग के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिविल अस्पताल में जब मरीज को लाया गया तो वह ट्रामा वार्ड में दाखिल हुआ। ट्रामा वार्ड में उसका चैकअप किया गया और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को किसी तरह के कोरोना लक्षण उसमें नहीं मिले। उसे वापस भेज दिया गया। हालांकि सेहत विभाग का कहना है कि मरीज अपनी मर्जी से व्हील चेयर से भी नीचे नहीं उतरा और 30 मिनट में उसके परिवार वाले उसे घर ले गए। हालांकि सेहत विभाग के कर्मचारी जान हथेली पर रखकर इस वक्त काम कर रहे हैं लेकिन एक बात हैरान करने वाली है कि पटेल अस्पताल ने अगर लक्षण बताए थे तो उसे जालंधर सिविल अस्पताल ने बाहर कैसे जाने दिया।

पुलिस पकड़ पकड़ कर ला रही, जो अस्पताल पहुंचा उसे दाखिल नहीं किया?

corona virus in Punjab Trauma Center Jalandhar civil
अब ट्रामा सेंटर के बाहर दो पुलिस वालों को तैनात कर दिया गया है। गीला फर्श आप देख रहे हैं। मरीज के जाने के दो दिन बाद इसे धोया गया है।

सोशल मीडिया पर सभी ने पंजाब भर से आने वाले वीडियो देखे होंगे जिसमें पुलिस के पहले में एनआरआईज और विदेश से आने वालों को अस्पतालों में ले जाया जा रहा है। इस वक्त पंजाब पुलिस की ज्यादा एनर्जी तो एनआरआईज के घर के पते ढूंढने और उन्हें पकड़ पकड़ कर सरकारी अस्पतालों में लाकर स्क्रीनिंग करने में लग रही है। फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। मरीज इटली से आया था यह पुलिस प्रशासन 13 दिन से जानती थी। अब विभाग का कहना है कि बुजुर्ग 18 लोगों के संपर्क में रहा था। उस हिसाब से उन 18 ने कितने लोगों से संपर्क साधा होगा यह सवाल शायद कोई हल नहीं कर सकता।

इटली भी अपने हेल्थ सिस्टम की पीठ थपथपाता रहा, अब लोग सड़कों पर मर रहे हैं

CATHOLIC CHURCH AFTER CORONA
इटली पूरी तरह से बंद हो गया है।

पंजाब में जो गलती सेहत विभाग कर रहा है वही गलती इटली ने की थी। इटली को अपने संसाधनों और हेल्थ सिस्टम पर काफी भरोसा था। मगर तीसरी स्टेज में हेल्थ सिस्टम फेल हो जाता है। सरकार के पास इटली से आने वालों की लिस्ट थी। उन पर ही तो खास नजर रखने की जरूरत थी। सब जानते हैं कि वायरस देश के बाहर से आने वाला है या आया है। ऐसे में इटली होकर आए मरीज कए इलाज के अभाव में मौत कई सवाल खड़े कर रही है।

देश में अब तक 173 मरीज मिले

पीएम मोदी भी 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की बात कर चुके हैं। पंजाब सरकार ने भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट और 20 से ज्यादा लोगों की हाजिरी वाले फरमान जारी कर दिए हैं। सरकार की अपनी एक सीमा है। वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। यह वायरस दुनिया भर के 178 देशों में 244364 लोगों के शरीर में दाखिल हो चुका है। 10007 की जान जा चुकी है। जितना लोग कम भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाएंगे। उतना इस वायरस को हराने में मदद मिलेगी। इस वायरस की ताकत हम इंसानों का एक दूसरे से लगातार मिलतने रहना है। लोग आपस में कम मिलेंगे तो वायरस कम फैलेगा। बचाव ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। बाकी रही अस्पतालों की बात तो अस्पताल तो सीमित लोगों को ही दाखिल कर सकते हैं। वैसे भी एक जिले में जिला अस्पताल के पास ही मुश्किल से दो तीन काम के वेंटिलेटर होते हैं। प्राइवेट अस्पताल मरीजों पर हाथ नहीं डाल रहे। ऐसे में मरीज जाएं तो कहां जाएं।

क्रमांकराज्य का नामभारतीय मरीजविदेशी मरीजठीक हुएमौतें
1आंध्र प्रदेश2000
2छत्तीसगढ़1000
3दिल्ली11131
4हरियाणा31400
5कर्नाटक14001
6 केरल25230
7महाराष्ट्र44301
8ओडीशा1000
9पुडुचेरी1000
10पंजाब2001
11राजस्थान5230
12तमिलनाडु2010
13तेलंगाना4210
14चंडीगढ़1000
15जम्मू कश्मीर4000
16लद्दाख8000
17यूपी18190
18उत्तराखंड1000
19बंगाल1000
कुल मामले जो भारत में टेस्ट हुए (148+25=173)14825204

Precautionary Measures taken by PIMS:-

PIMS director Amit Singh
Amit Singh Resident Director PIMS

Jalandhar: – Due to rising cases of Corona Virus in World as well as in India, Punjab Institute of Medical Sciences (PIMS), Jalandhar has decided to take some precautionary measures in order to prevent this disease. Mr.Amit Singh (Resident Director PIMS) said that, 18years elderly peopleshould not step out of homes. People should visit hospitals only in case of emergency; routine visitto hospitals should be avoided. A patient admitted in PIMS is advised to have only one attendant at a time. On other hand, footfall of patients is also under watch, as PIMS has started Per Screening for every patient at entrance of hospital. Any patient with symptoms of flu will be thoroughly checked by our team of doctors. People are in state of fear because of Corona virus butthings can get better by taking some basic steps. Like avoiding crowded places, washing hands again and again, using alcohol based sanitizer and maintain proper hygiene. PIMS has always serve society and will do the same in future, and hope for full cooperation from the general public.   

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