जागरुकता की कमीः महिला मरीज के साथ परिवार ने सत्यम अस्पताल में किया हंगामा, मरीज के खिलाफ स्टाफ भी धरने पर बैठा

पढ़ें मरीज को क्या कोरोना के लक्षण थे? आखिर लोग अस्पताल क्यों भाग रहे हैं?

रवि रौणखर, जालंधर

कोरोना से डरें न। बेवजह खौफ भी पैदा न करें। यकीन नहीं आता तो आज कर्फ्यू के बाद सत्यम अस्पताल में जो हुआ उसे पढ़ेंः

सिविल सर्जन दफ्तर में सोमवार शाम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मेंबर्स और सेहत विभाग के अधिकारी कोरोना (COVID-19) पर मीटिंग कर रहे थे। मीटिंग के बीच ही डीसी वीके शर्मा की कॉल आईएमए पंजाब प्रधान डॉ. नवजोत दहिया के फोन पर आई। डीसी कह रहे थे कि कोई प्राइवेट अस्पताल मरीज को लेकर धरने पर है। जरा मामले को तो देखिए। डॉ. दहिया और पूर्व प्रधान डॉ. हरीश भारद्वाज सत्यम अस्पताल पहुंचे। वहां एसीपी सेंट्रल डीएसपी हरसिमरत अपनी टीम के साथ पहले से मौजूद थे।

Satyam Hospital Jalandhar Corona in Punjab
डॉ. दहिया, डॉ. भारद्वाज, एसीपी सेंट्रल व पुलिस अधिकारी

डॉ. दहिया ने मौके पर स्टाफ और पुलिस से हालात का जायजा लिया। मौके पर महिला मरीज के परिजनों ने बताया कि हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमारी बेटी के टेस्ट और चैकअप हो जाएं। अस्पताल वाले हमें देख ही नहीं रहे। हम कह रहे हैं ठीक है हमें सिविल अस्पताल भेज दो तो वे एंबुलेंस भी नहीं दे रहे। हमारी बेटी ट्रैवल एजेंसी में है।

Satyam Hospital Jalandhar Corona panic in Jalandhar Punjab
पुलिस अधिकारी बरजिंदर सिंह व अस्पताल का स्टाफ

पुलिस और आईएमए की टीम ने जब अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. राजेश पसरीचा से पूछा तो उन्होंने कहा कि वह ऑप्रेशन थियेटर में थे। सर्जरी अभी अभी खत्म हुई है और स्टाफ ने मुझे बताया है कि मरीज को दाखिल करने के लिए कहा तो वह टेस्ट कराने की जिद करने लगा। हम तो मरीज दाखिल करने के लिए तैयार थे लेकिन मरीज साथ नहीं दे रहा था। मरीज ने बेवजह हंगामा किया। उन्होंने तुरंत मरीज को क्लीनिकली चैक किया लेकिन मरीज के परिजन टेस्ट करवाने के लिए जोर लगा रहे थे।

ग्लोबल अस्पताल की एंबुलेंस में मरीज सिविल पहुंचाया

Global Hospital Jalandhar Corona panic in Jalandhar Punjab

महिला मरीज ने बताया कि वह ट्रैवल एजेंसी में काम करती है। इसलिए मेरा टेस्ट कर दो। परिवार भी टेस्ट पर अड़ा था। ऐसे में मौके पर मौजूद डॉ. दहिया ने अपने अस्पताल ग्लोबल हॉस्पिटल से एंबुलेंस मंगवाई और मरीज को सिविल अस्पताल पहुंचाया। सिविल आकर भी मरीज के परिजन नाराज थे। वह कभी आपस में लड़ रहे थे तो कभी बार बार अपने बयान बदल रहे थे। एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह कोरोना नहीं बल्कि न्यूरोसाइकेट्री का केस था। महिला ने तीन बार अपनी स्टेटमेंट बदली।

मरीज न्यूरो की समस्या के चलते अस्पताल गया था

Corona Fear in Punjab
मरीज की जब सिविल में जांच हुई तो उसमें क्रोना के लक्षण नहीं मिले

अधीर हो रहे परिवार को डॉक्टरों ने शांत कराया और प्राथमिक जांच में पाया कि उसे कोरोना के लक्षण नहीं थे। मरीज ने अपनी पुरानी रिपोर्ट भी दिखाई जिससे साफ हो गया कि मरीज न्यूरो का पेशेंट था और उसे 18 मार्च को पहली बार दौरे पड़े थे। 18 को पटेल में दाखिल किया। 20 को छुट्टी हुई। महिला ने बताया कि उसका नाक बह रहा था। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। खांसी थी।

जागरुकता और मोटिवेशन की कमी के चलते स्टाफ और मरीज उलझे थे

डॉक्टरों ने मरीज को घर जाने की सलाह दी गई। यानी मरीज ऐसी स्थिति में बिलकुल नहीं था कि उसे दाखिल किया जाता। एक वरिष्ठ सर्जन ने बताया कि कई बार मरीज को दौरे पड़ने के बाद भी बेचैनी होती है। अब हर बेचैनी या हर नाक के बहने को कोरोना न बनाया जाए। इस मरीज की तो कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं थी। वह किसी भी कोरोना पॉजीटिव मरीज से भी नहीं मिली थी। ऐसे में यह केस न्यूरो का है न कि कोरोना का।

अस्पताल स्टाफ को धरना नहीं लगाना चाहिए था

यह सिर्फ लोगों के दिलों में कोरोना को लेकर घर कर चुका डर था। इस डर के चलते ही परिवार घर से निकला जबकि मरीज को कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। अस्पताल के स्टाफ को भी धरने पर नहीं बैठना चाहिए था। अगर हर व्यक्ति यूं ही छोटी छोटी चीजों को लेकर अस्पताल आता रहा तो अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।

संदिग्ध मरीज के लक्षण, उसे दाखिल और डिस्चार्ज करने तक की विधि वेबसाइट पर है- डॉ. दहिया

dr navjot Dahiya
डॉ. दहिया (आईएमए प्रधान पंजाब)

https://www.mohfw.gov.in/for_hospitals.html

आईएमए प्रधान डॉ. नवजोत दहिया ने बताया कि जालंधर में सभी अस्पतालों को अपने स्टाफ को पूरी तरह से मुस्तैद और मोटिवेट करना चाहिए। स्टाफ में जागरुकता और कोरोना से लड़ने के लिए जरूरी जोश की कमी के चलते ऐसी घटनाएं हो रही हैं। हर अस्पताल चाहे तो अलग से एक आइसोलेशन या फ्लू कॉर्नर बना सकता है। उसकी सारी विधि सेहत विभाग की वेबसाइट https://www.mohfw.gov.in/for_hospitals.html पर उपलब्ध है। आईएमए के सहयोग के बिना यह जंग नहीं जीती जा सकती। इसलिए हर डॉक्टर को अपने अपने अस्पताल में अलग चिन्हित जगह कोरोना संदिग्ध मरीजों के लिए रख लेनी चाहिए। उसे चैक करो। अगर लक्षण ज्यादा हैं तो या दाखिल कर लो या रेफर कर दो। मगर हर मरीज को अटेंड जरूर किया जाए।

खबर का निष्कर्ष

मरीज को लगा कि ट्रैवल एजेंट होने के चलते बहुत सारे एनआरआई उसके संपर्क में आए होंगे। उसे न्यूरो की समस्या थी और कोरोना का भय पूरे परिवार के मन में पहले से था। दूसरी ओर अस्पताल का स्टाफ भी पूरी तरह से मोटिवेट और जागरुक नहीं था। कोरोना को इस तरह से नहीं हराया जा सकता। अफवाहों और बेवजह के डर से काम नहीं चलेगा। घर से बाहर मत निकलो। दूरी बनाओ। बस यही कोरोना को परास्त करेगा।

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