तीन साल से चलफिर नहीं पा रहा था, सीएमसी और एम्स से निराशा मिली, डॉ. त्रिवेदी ने पैरों पर खड़ा कर दिया

कोरोना के खतरे के बीच भी मेडिकल वॉरियर लगातार लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में जुटे हैं

मशहूर अस्पताल सीएमसी में सर्जरी के बाद हालत ज्यादा बिगड़ गई थी

रवि रौणखर, जालंधर

“चार पांच महीने मेरी टांगों में दर्द होता रहा। धीरे धीरे खड़ा होने की ताकत मैं खोने लगा था। हाथ से एक कप चाय उठाना भी पहाड़ चढ़ने जितना मुश्किल बन गया था। झारखंड के अलग अलग अस्पतालों में जाता रहा। डॉक्टर दवा देते रहे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तमिलनाडु के सीएमसी वेल्लोर के डॉक्टरों को दिखाया। उन्होंने कहा सर्जरी से ठीक हो जाएगा। सर्जरी भी हुई। हालात पहले से ज्यादा बिगड़ गए। अब बैठ भी नहीं पा रहा था।”

सर्जरी के बाद दवा भी काम न आई

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गर्दन की पिछली ओर से किया गया ऑप्रेशन। माहिर डॉक्टरों का कहना है कि ऑप्रेशन गले की ओर से किया जाना चाहिए था। प्रमोद की हालत इस सर्जरी के बाद और बिगड़ गई।

“दोबारा सीएमसी गया तो बोले दवा खा लो। दो महीने दवा खाई। कोई फर्क नहीं पड़ा। दिल्ली के एम्स गया। मगर वहां जूनियर डॉक्टर देखते रहे। एक के बाद एक टेस्ट हुए। तो डॉक्टरों ने कहा 3 महीने वेटिंग है। सर्जरी करनी पड़ेगी। सर्जरी करने वाले ने बोला पक्का नहीं है कि तुम ठीक हो सकते हो।

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तीन साल धक्के खाने और लाखों लुटाने के बाद भी निराशा हाथ लगी। डॉक्टरों से मेरा भरोसा उठ रहा था

वहां से फोर्टीज गया। उन्होंने एमआरआई और टेस्ट की लंबी लिस्ट हाथ में थमा दी। मुझे बहुत घुटन महसूस हो रही थी। मेरा भरोसा अब डॉक्टरों से टूट रहा था।”

काश तीन साल पहले मैं जालंधर आ जाता

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प्रमोद

“तीन साल से मैं और मेरा परिवार अस्पतालों के चक्कर काट रहा था। इस दौरान मैं इंटरनेट पर लगातार सर्च भी करता रहता था। शायद कहीं कोई डॉक्टर हो जो मुझे फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दे। एक दिन जालंधर के स्पाइन मास्टर्स अस्पताल का वीडियो देखा। मुझे उस डॉक्टर की बात थोड़ी जच गई। परिवार ने कहा एक बार चांस लेकर देख लेते हैं। इस तरह मैं जालंधर पहुंचा। सोचता हूं कि मुझे पहले वह वीडियो क्यों नहीं मिल गया।”

अगली बार अमृतसर और माता वैष्णो देवी माथा टेकने जाउंगा

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प्रमोद अब बिना सहारे के चल फिर पा रहा है

डॉ. पंकज त्रिवेदी के स्पाइन मास्टर्स यूनिट में वार्ड से कोरीडोर और कोरिडोर से वार्ड के चक्कर काट रहे 41 साल के प्रमोद कुमार को यकीन नहीं हो रहा था कि वह 3 साल बाद बिना किसी सहारे के चल पा रहा है। झारखंड के गुमला शहर के रहने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान मालिक प्रमोद की पिछले हफ्ते ही सर्जरी हुई है। रविवार को वह अपने घर इस उम्मीद के साथ रवाना हुआ कि फॉलोअप के लिए जब आएगा तो अमृतसर गोल्डन टैंपल, अटारी बॉर्डर पर परेड देखकर ही लौटे। माता वैष्णो देवी जाकर माथा टेकने की भी उसकी इच्छा है।

गर्दन के मणकों में समस्या थी, गर्दन सिर का भार नहीं उठा पा रही थी

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उसकी गर्दन के मणकों में समस्या थी। धीरे धीरे गर्दन इतनी कमजोर हो गई कि सिर का भार उठा पाना मुश्किल हो रहा था। ठोडी छाती के साथ जुड़ने लग गई थी और उसके कंधे से नीचे के अंगों पर भयानक असर पड़ रहा था। गर्दन के मणके खिसकने से उसकी स्पाइनल कोर्ड पर जबरदस्त दबाव पड़ चुका था। इसी वजह से ही हाथ पैर चलने बंद हो गए थे। यही कारण था कि उसका शरीर एक तरह के लकवे से ग्रस्त होता जा रहा था। थोड़ी देर और हो जाती तो गर्दन के नीचे का पूरा हिस्सा बेकार हो जाता।

डॉ. पंकज त्रिवेदी ने हमें 30 मिनट दिए, पहली बार किसी डॉक्टर ने इतनी गंभीरता से समझाया था

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सीनियर न्यूरो व स्पाइन सर्जन डॉ. पंकज त्रिवेदी

हम जालंधर पहुंचे। स्पाइन मास्टर के चीफ न्यूरो एंड स्पाइन सर्जन डॉ. पंकज त्रिवेदी ने 30 मिनट तक समझाया कि समस्या क्या थी और अब इलाज क्या होने वाला है। उन्होंने बताया कि आपकी सर्जरी गर्दन की पिछली ओर से की गई थी। इसलिए वह ज्यादा कामयाब नहीं हो पाई। प्रमोद ने बताया कि डॉ. साहब ने साफ साफ कहा था कि इस बार सर्जरी आगे से होगी और महज की-होल (Key hole) जितना कट लगेगा। कोई टांका नहीं। दूरबीन से ऑप्रेशन हो जाएगा।

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अपनी पत्नी मिनी के साथ प्रमोद


यह पहला मौका था जब किसी डॉक्टर ने हमें इतना समय दिया हो। हमें जो बताया गया वैसा किसी डॉक्टर ने पहले नहीं बताया था। सीएमसी वेल्लोर ने लंबा चीरा लगाकर ओपन सर्जरी की थी। यहां बिना टांके के सर्जरी होने वाली थी। मैने अपनी पत्नी की ओर देखा और हम सर्जरी के लिए तैयार हो गए।

यहां रुटीन सर्जरी लेकिन दुनिया के ज्यादातर डॉक्टर इसे नहीं कर पाते

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प्रमोद अपनी मुट्ठियां जोर से भींचते हुए बताता है कि मैं इतना भी नहीं कर पाता था। लगता था जान ही नहीं बची है। एक मरीज आधा डॉक्टर तो बन ही जाता है। स्पाइन सर्जरी सबसे जटिल मानी जाती है। मुझे सी-3, सी-6 में समस्या थी। सीएमसी वेल्लोर के डॉक्टरों ने जो सर्जरी की उसके बाद सी-4 और सी-5 भी मेरे दर्द में हिस्सेदार बन बैठी। यानी सर्जरी ने मेरा दोगुणा नुकसान कर डाला था।

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मैं बहुत कम पढ़ा हूं लेकिन रीढ़ के आराक और इसकी संरचना को मैं बखूबी समझ चुका हूं। स्पाइन सर्जरी करना हर किसी सर्जन के बस की बात नहीं है। खासकर जब बिना टांका लगाए दूरबीन से स्पाइन सर्जरी करनी हो। दुनिया में बहुत कम न्यूरो सर्जन हैं जो यह कर पाते हैं। सर्जरी के बाद पता भी नहीं लगता कि ऑप्रेशन हुआ भी है। जबकि मेरी गर्दन की पिछली ओर लंबा सा चीरा लगा है। जो ऑप्रेशन डॉ. त्रिवेदी के लिए रुटीन का काम है उसे दुनिया के ज्यादातर डॉक्टर कर भी नहीं पाते।

गर्दन में एक बटन लगाना पड़ा, कुछ दिनों बाद आते तो जिंदगी बिस्तर पर ही कटती

डॉ. पंकज त्रिवेदी

प्रमोद को नई जिंदगी देने वाले डॉ. पंकज त्रिवेदी ने बताया कि सिर आगे की ओर लटक रहा था। स्पाइनल कोर्ड पर इतना ज्यादा दबाव था कि कुछ दिनों बाद अगर वह हमारे पास आता तो शायद कभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता। सिर के भार से स्पाइनल कोर्ड बुरी तरह डैमेज होने वाली थी। गले में छोटा सा सुराग करके हम दूरबीन की मदद से हम उसकी स्पाइनल कॉर्ड तक पहुंचे। वहां एक बटन लगाकर उसके मणके रिपेयर किए। सर्जरी सफल रही। अक्सर यह समस्या ज्यादा भार उठाने वाले और गर्दन झुकाकर रखने वालों को होती है।

होश आया तो मैं टांगे हिला पा रहा था, हाथ से इशारा करके बीवी को बताया

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प्रमोद अब बिना किसी सहारे के घुटना मोड़ पा रहा है।

जालंधर पोस्ट से बात करते वक्त प्रमोद काफी भावुक था। उसने बताया कि जब होश आया मैं आईसीयू में था। मैं बिना किसी रुकावट के टांगे हिला पा रहा था। सालों बाद खुद करवट बदली तो लगा शरीर में जान आ गई है। इस दुख की घड़ी में सबसे ज्यादा साथ देने वाली मेरी बीवी उस वक्त मेरे सामने खड़ी थी। मैने अपना हाथ उठाकर उसे इशारा किया। सब ठीक हो गया है। उसकी आंखों में आंसू थे।

मरीज से ज्यादा उसके परिजन सहते हैं

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विपरीत समय में अपने पति का सहारा बनी पत्नी मिनी देवी भी सर्जरी के बाद काफी खुश है

प्रमोद ने बताया कि मरीज तो बेड पर लेटा रहता है। उसे तो समस्या होती ही है लेकिन उसके परिवार वाले बिना किसी बात की सजा झेलते हैं। मुझे पकड़ पकड़ कर अस्पतालों में ठोकरे खाना। घंटों डॉक्टर से अप्वाइंटमेंट के लिए लाइन में लगना। अस्पतालों में फर्श पर लेट रातें काटना। किसी शादी ब्याह या फंक्शन पर नहीं जाना। हर वक्त दवा, रिपोर्ट, एमआरआई और इलाज की बातें करना। मेरी पत्नी मिनी देवी, भाई और बच्चों की जिंदगी मेरे इर्द गिर्द ही घूम रही थी। मरीज को तो बैठे बिठाए सब मिल जाता है लेकिन परिवार वाले असली दुख सहते हैं।

गर्दन झुकाकर काम करने से यह हालत हुई

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आगे से छेद करके सर्जरी की गई। इस समस्या का मुख्य कारण गर्दन को झुकाकर रखना या ज्यादा भार उठाना माना जाता है।

प्रमोद की हालत इतनी खराब कैसे हो गई इसका असली कारण उसे भी नहीं मालूम। मगर उसने बताया कि वह घंटों गर्दन झुकाए काम करता रहता था। उसी से समस्या पैदा हुई और हालात लकवे तक पहुंच चुके थे। जब बिल की बात आई तो प्रमोद ने कहा कि डॉक्टर साहब ने बहुत कम लागत में यह सर्जरी कर दी है।

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