जिस सर्जरी को इटली के डॉक्टर 4 साल तक नहीं कर पाए उसे डॉ. त्रिवेदी ने 30 मिनट में कर दिखाया, मरीज को पैरों पर खड़ा किया

रवि रौणखर, जालंधर

भारत के डॉक्टर कितने काबिल हैं इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब एक एनआरआई 4 साल तक इटली के डॉक्टरों के पास धक्के खाता रहा मगर जालंधर के डॉक्टर ने 30 मिनट के ऑप्रेशन के बाद ही उसे ठीक कर दिया। हम बात कर रहे हैं 43 साल के सतिंदर सिंह की जो इटली के मिलान शहर में रहते हैं। वह इटली के नागरिक हैं और पिछले चार सालों से रीढ़ की हड्डी के मणकों की समस्या से जूझ रहे थे। सतिंदर की पिछले दिनों जालंधर के सर्वोदय अस्पताल के स्पाइन मास्टर यूनिट में सर्जरी हुई थी। उनकी बाईं टांग सुन्न हो चुकी थी। चलना बेहद मुश्किल हो रहा था। न्यूरो और स्पाइन सर्जन डॉ. पंकज त्रिवेदी ने सतिंदर का सफल ऑप्रेशन किया और अब वह 8 फरवरी को इटली के लिए सही सलामत रवाना हो गए हैं। सतिंदर ने बताया कि जो काम इटली के डॉक्टर नहीं कर पाए उसे डॉ. त्रिवेदी ने कर दिखाया है। उन्हें इस बात का भी अफसोस है कि वह जालंधर पहले क्यों नहीं आए। सतिंदर का उदाहरण इस बात की ओर भी इशारा करता है कि भारत बड़ी तेजी से दुनिया का मेडिकल हब बनता जा रहा है। अमेरिका और यूरोप में जहां डॉक्टरों के पास अप्वाइंटमेंट ही 3-4 महीने बाद मिलती है वहीं भारत में जटिल से जटिल ऑप्रेशन भी बिना समय गंवाए संभव हो पा रहे हैं। यह सब भारत के काबिल डॉक्टरों के कारण संभव हो पा रहा है।

तीन महीने बाद डॉक्टर की अप्वाइंटमेंट मिलती है

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सतिंदर

यह हैरान करने वाली खबर है क्योंकि भारत के लोग बेहतर इलाज के लिए विदेशों का रुख करते हैं लेकिन विदेशों में ओपीडी की अप्वाइंटमेंट के लिए भी तीन तीन महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। इटली रवाना होने से पहले जब सतिंदर से हमने पूछा कि उन्होंने इटली में इलाज क्यों नहीं करवाया तो उन्होंने कई कारण बताए। सभी कारणों को सुनकर यकीन नहीं हो रहा था कि यूरोप के इटली जैसे देश में मेडिकल सेवाओं का स्तर ऐसा भी हो सकता है। सतिंदर ने बताया कि इटली में डॉक्टर की अप्वाइंटमेंट ही तीन महीने की वेटिंग के बाद मिलती है। उसके बाद ऑप्रेशन के लिए भी महीनों इंतजार करना पड़ता है। मेरी रीढ़ की हड्डी में समस्या थी। दाईं टांग सुन्न होती जा रही थी। दर्द बढ़ रहा था। मैं इटली के डॉक्टरों के पास चक्कर काट रहा था लेकिन वह दवा देते रहे। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा।

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स्टिचलैस सर्जरी से मरीज जल्द अपने काम पर लौट जाता है। ज्यादा दिन अस्पताल में भी नहीं ठहरना पड़ता।

2016 से 2019 के बीच 7 बार भारत भी आया

2016 से 2019 के बीच मैं 7 बार भारत भी आया। सिर्फ अपनी तक्लीफ से छुटकारा पाने के लिए। दिल्ली से लेकर पंजाब के अलग अलग अस्पतालों में गया। सभी दवा दे देते। मैं भारत आता और दवा लेकर चला जाता। जहां कोई कहता मैं वहां चला जाता। अमृतसर, पठानकोट, लुधियाना। हर शहर के बड़े माहिरों से मैं मिल चुका था। पैसा भी काफी खर्च हो गया। उसका हिसाब ही नहीं है।

50 हजार से ज्यादा तो अकेले एमआरआई के लग चुके हैं

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सतिंदर

सतिंदर ने बताया कि जिस भी डॉक्टर के पास जाते वह एमआरआई करवाता। एक टेस्ट के बाद दूसरा टेस्ट होता। 50 हजार तो अकेले एमआरआई के ही लग गए थे। मगर कहानी अभी तक साफ नहीं हो पा रही थी कि आखिर मेरी दर्द और मेरी तक्लीफ का इलाज क्या है?

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सोने के लिए नींद की गोलियां खा रहा था

ऐसे हालात में व्यक्ति क्या करे। हर पल दर्द। ऐसे में रात को नींद भी नहीं आती थी। इटली में डॉक्टरों ने मुझे सोने के लिए नींद की गोलियां लिख दीं। मैं लेने लगा। चार साल से ले रहा हूं। अब सर्जरी के बाद ठीक हो गया हूं तो उन गोलियों को लेना बंद कर रहा हूं।

दर्द से चिड़चिड़ा होने लगा था

मैं पहले हर महीने 2.5 लाख रुपए कमाता था। दर्द होने लगी। एक टांग सुन्न हो गई। चलना फिरना सीमित हो गया। थोड़ा सा चलता था थक जाता था। मेरी आमदनी खत्म होने लगी थी। हालात ऐसे थे कि आमदनी खत्म होती जा रही थी। मैं डिप्रेशन में जा रहा था। चिड़चिड़ा हो गया था।

एक पंजाबी ने रास्ता बताया

इटली में एक पंजाबी नौजवान मिला। उसने बताया कि उसे भी ऐसी ही समस्या थी। उसने सोशल मीडिया पर डॉ. त्रिवेदी के बारे में सुना और जालंधर आकर ऑप्रेशन कराया। उससे मैं प्रभावित हुआ और डॉ. त्रिवेदी के बारे में और वीडियो देखे। मकर मैने इटली में अपने डॉक्टर से बात की कि क्या आप मेरा वही ऑप्रेशन कर सकते हैं? इटली के डॉक्टरों ने कहा नहीं। उन्होंने कहा हम ऑप्रेशन तो कर सकते हैं लेकिन ओपन सर्जरी करेंगे। लंबा चीरा लगेगा और गारंटी नहीं है कि आपकी समस्या दूर होगी। मैने उस पंजाबी दोस्त की बात पर यकीन किया और भारत आने का फैसला किया।

पहली मुलाकात में डॉ. त्रिवेदी की बात मुझे जच गई

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सतिंदर

मैने इटली से ही डॉ. त्रिवेदी को अपनी रिपोर्ट भेजी और उन्होंने कहा कि वह मुझे ठीक कर सकते हैं। मैने अगली फ्लाइट से भारत आने का फैसला किया। भारत आया और डॉ. दूसरे दिन डॉ. त्रिवेदी से मिला। पहली मुलाकात में मुझे उनकी बात जच गई और मैने सर्जरी करवाने का फैसला किया। मैं चार साल तक इंतजार कर चुका था और किसी डॉक्टर से मुझे ऐसा आश्वासन नहीं मिला था। मैं अस्पताल में आकर भर्ती हो गया।

सर्जरी के तुरंत बाद डॉ. साहब ने कहा तुम भागकर अपने रूम तक जा सकते हो

सर्जरी से पहले डॉ. साहब ने कहा कि जब यह सर्जरी हो रही होगी तुम होश में ही रहोगे। तुम्हे पूरी तरह से बेहोश करके यह सर्जरी नहीं की जा सकती। सर्जरी में मुश्किल से आधा घंटा लगा। सर्जरी खत्म हुई तो डॉक्टर साहब बोले तुम चाहो तो दौड़ कर अपने रूम तक जा सकते हो। मुझे यकीन नहीं हुआ। मैं दौड़ कर तो नहीं आया लेकिन तेज चलते हुए अपने रूम तक पहुंचा तो जाकर यकीन हुआ कि मेरी समस्या दूर हो चुकी है। वह सच में भावुक करने वाला पल था।

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मुझे पहले पता होता तो मेरे 4 साल बच जाते

सतिंदर ने बताया कि मुझे पता होता तो मैं पहले ही डॉ. त्रिवेदी के पास आ जाता। मैने चार साल बहुत कुछ सहा है। सर्जरी के बाद एहसास हो रहा है कि मैं पहले डॉ. साहब के पास क्यों नहीं आ गया। सिर्फ छोटा सा चीरा लगाकर उन्होंने दूरबीन से मेरा ऑप्रेशन किया।

यह अंतर्राष्ट्रीय लेवल का अनुभव था

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सतिंदर अब पहले की तरह काम काज कर पाएंगे।

इटली जैसे विकसित देश के वासी का सफल ऑप्रेशन जब जालंधर से स्पाइन मास्टर में हुआ तो सतिंदर को एहसास हुआ कि भारत के डॉक्टर कितने काबिल हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इटली से बेहतर सेवाएं उन्हें भारत में मिली हैं तो वह बोले कि यह अंतर्राष्ट्रीय लेवल का अस्पताल है। जिस ऑप्रेशन को करने के लिए इटली के डॉक्टरों के हाथ खड़े हो गए उसे इतने सहज और आसानी से यहां के डॉक्टर ने अंजाम दे दिया था।

मरीज को दर्द से बाहर निकालना और उसे बेहतर जिंदगी देना एक सुखद अनुभव है- डॉ. त्रिवेदी

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डॉ. पंकज त्रिवेदी

सतिंदर को नई जिंदगी देने वाले डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि सतिंदर जैसे मरीज जब ठीक होकर जाते हैं तो उन्हें बहुत संतुष्टि मिलती है। उसकी रीढ़ की हड्डी के मणके स्पाइनल कोर्ड को प्रेस कर रहे थे। नसों पर दबाव से उसकी टांग को जाने वाले सिग्नल बाधित हो रहे थे। हमने दूरबीन की सहायता से ऑप्रेशन किया और उसकी समस्या को दूर कर दिया। मरीज जब आया था तब चल पाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था। मगर सर्जरी के बाद वह बिलकुल पहले जैसा हो गया है। यही एक सर्जन का काम है। हमारे टीचर्स हमेशा कहते थे कि मरीज ही आपके लिए भगवान हैं। उनकी जितनी सेवा करोगे उतना ही आपको यश मिलेगा। इससे पहले कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हमारे अस्पताल आकर ऐसी समस्याओं से निजात पा चुके हैं। बहुत कम पेशे ऐसे होते हैं जिसमें आपको लोगों की जिंदगी बेहतर करने के मौके मिलते हैं।

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