पोप ने सभा नहीं की, मगर खांबड़ा चर्च के अंकुर नरूला ने 10 हजार लोगों से कहा हम बसों में भर भर कर जाएंगे, कोरोना को शर्मिंदा करेंगे

अपोसल नरूला ने कहा बसों से कोरोना पर फायर करेंगे

रवि रौणखर, जालंधर

ईसाइयों की आस्था के केंद्र वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने कोरोना वायरस के चलते सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं किया लेकिन जालंधर के खांबड़ा गांव में पादरी अंकुर नरुला ने कोरोना वायरस को चैलेंज करते हुए कहा यह वायरस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इटली की 900 से अधिक चर्चों को जहां प्रार्थना सभाओं के लिए बंद कर दिया गया है वहीं अपोसल अंकुर नरुला लगभग 10000 लोगों को मंगलवार, वीरवार और रविवार को फिर से चर्च में बुला रहे हैं। रविवार को यहां मसीही सत्संग था।

POP FRANCIS VATICAN ON CORONA
पोप फ्रांसिस, वेटिकन

सब जानते हैं कि ईसाइयों के सबसे बड़े धार्मिक नेता पोप होते हैं। पोप इटली की राजधानी रोम के बीचोबीच 110 एकड़ में बनी वेटिकन सिटी में रहते हैं। वेटिकन सिटी के एक कर्मचारी को जब कोरोना पॉजीटिव पाया गया तब वेटिकन ने बाहरी लोगों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए थे। इटली में अब तक कोरोना वायरस से 1800 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में चर्च ने जिम्मेदारी से काम लेते हुए प्रार्थना सभाओं को स्थगित कर दिया है। मगर सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के पादरी पोप से भी ऊपर हो गए हैं कि वह हजारों लोगों की भीड़ जुटा रहे हैं।

कोरोनावायरस (COVID-19) को कंट्रोल करने में क्या भारत इटली जैसी गलती कर रहा है? पिछले एक हफ्ते में इटली में रोजाना मिलने वाले मरीजों की गिनती की रफ्तार चीन से भी तेज है। जालंधर में भी ऐसे हालात बन रहे हैं। खांबड़ा में रविवार को अपोसल अंकुर नरूला द्वारा आयोजित मसीही सत्संग में भारी भीड़ जमा थी।

रोम में प्रार्थना सभाएं स्थगित लेकिन जालंधर में इस हफ्ते हजारों को बुलाया गया

मगर खांबरा चर्च के अपोसल अंकुर नरुला ने ऐलान किया है कि मंगलवार के बाद वीरवार और फिर अगले रविवार को हजारों की गिनती में अनुयायियों को बुलाया है। साथ ही यह भी कहा है कि वीरवार को प्रभु भोज के बाद खांबड़ा चर्च की बसों में भरकर अनुयायी पंजाब के कोने कोने में जाएंगे। बस से ही फायर बरसाएंगे और कोरोना को हराएंगे।

याद रहे कि 31 जनवरी को इटली ने जब चीन आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया तो यूरोप का यह प्रमुख देश अपनी पीठ थपथपा रहा था। चीन इटली के इस बैन से नाराज भी हुआ था। साथ ही इटली ने यह भी दावा किया था कि उसके अस्पतालों के आईसीयू किसी भी आपदा का सामना करने के लिए तैयार हैं। मगर उसने एक बड़ी गलती कर दी थी। लोगों की भीड़ और सार्वजनिक कार्यक्रमों को काबू नहीं किया। पर्यटक स्थल खुले रखे। पब, बार और स्टेडियम्स में भीड़ जुटने दी।

वहां इक्का दुक्का पॉजीटिव केस भी आने लगे। इटली ने लापरवाही बरती। उसी का नतीजा है कि आज रोजाना इटली में 200 लोगों की मौत कोविड-19 से हो रही है। इटली ने लोगों (Community Transmission) को वायरस फैलाने में एक तरह की छूट जो दे दी थी। सेहत के जानकारों के मुताबिक लोग चुपचाप कोरोना फैलाते रहे। कुछ दिनों बाद ही विश्व ने इटली में कोरोना बम फटने जैसा मंजर देखा। जिसकी तबाही वहां आज भी जारी है

कोरोना को मारना नहीं है, उसे शर्मिंदा करना है- नरुला

रविवार को मसीही सत्संग में हजारों की भीड़ को संबोधित करते हुए अपोसल अंकुर नरुला ने कहा कि हम कोरोना को मारेंगे नहीं बल्कि उसे शर्मिंदा करेंगे। कोरोना हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

लड़की के मुंह से मास्क हटाया

Ankur Narula corona virus khambra unmask
Ankur Narula corona virus mask

मसीही सत्संग के दौरान अपनी समस्या लेकर आई एक लड़की ने मास्क से मुंह ढका था। कोरोना के खतरे को देखते हुए बहुत ज्यादा भीड़भाड़ के इलाकों में मास्क लगाना बेहद जरूरी है। मगर अपोसल अंकुर नरुला ने लड़की का मास्क हटा दिया।

दर्जनों बार कोरोना वायरस का मजाक उड़ाया

अपोसल अंकुर नरुला, खांबड़ा चर्च के पादरी

ईसाई धर्म में अपोसल उस शख्स को कहते हैं जो प्रभु यीशू मसीह की शिक्षाओं को जन जन तक पहुंचाता है। ऐसे में अपोसल का दायित्व बहुत बड़ा और जिम्मेदारी भरा होता है। पोप इस बात को जानते हैं। यहां तक की वेटिकन के पवित्र सेंट पीटर सक्वेयर को भी श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया। यह स्थान भी ईसाई धर्म के मानने वालों और दुनिया भर के पर्यटकों के लिए रोम की सबसे खास जगह माना जाता है। यानी जालंधर की खांबड़ा चर्च वेटिकन सिटी के सेंट पीटर्स सक्वेयर से भी बड़ा स्थान रखती है। प्रशासन धार्मिक मसलों में ज्यादा दखल नहीं देता लेकिन तेजी से फैलने वाले कोरोना वायरस को रोकने के लिए ऐसी सभाओं को न होने देना भी बेहद जरुरी है।

अगर लोग भीड़ से नहीं बचे तो कल को सड़कों पर मरीज दम तोड़ेंगे- एक डॉक्टर

Chines doctors
दुनिया इस महामारी में डॉक्टरों की भी परीक्षा ले रही है।

शहर के एक वरिष्ट और गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर का कहना था कि भारत में कोरोना वायरस स्टेज-2 से स्टेज-3 की ओर जा रहा है। अगर हालात खराब हुए तो 10 दिन के भीतर भीतर भारत की स्वास्थय प्रणाली 10 दिन में ही धवस्त हो जाएगी। लोग सड़कों पर दम तोड़ने लगेंगे। इसलिए बहुत ज्यादा एतिहात बरतने की जरूरत है।

स्टेज-3 की ओर बढ़ रहा है भारत

क्रमांकराज्य का नामभारतीय मरीजविदेशी मरीजठीक हुए लोगमौतें
1आंध्र प्रदेश1000
2दिल्ली7021
3हरियाणा01400
4कर्नाटक6001
5केरल22030
6महाराष्ट्र32000
7पंजाब1000
8राजस्थान2230
9तमिलनाडु1000
10तेलंगाना3010
11जम्मू कश्मीर2000
12लद्दाख3000
13उत्तर प्रदेश12140
14उत्तराखंड1000
कुल 9317132

देश से बाहर का व्यक्ति जब विदेशी भूमि में कोरोना से पीड़ित होकर भारत आता है और यहां टेस्ट में पॉजीटिव पाया जाता है तो उसे स्टेज-1 कहते हैं। यानी उस मरीज के शरीर में यह वायरस भारत में नहीं बल्कि विदेशी धरती में दाखिल हुआ था। स्टेज-2 उस स्थिति को कहते हैं जब स्टेज-1 वाले लोग भारत में रह रहे लोगों में यह वायरस पहुंचा देते हैं। बाहरी व्यक्ति भारत में रह रहे लोगों में संक्रमण पहुंचा रहे हैं। भारत में अभी तक कुल 110 मरीज मिल चुके हैं जिसमें से 93 मरीज भारतीय हैं। अब तेजी से यह वायरस हर राज्य में पहुंचने लगा है। स्टेज-3 में भारतीय लोग एक दूसरे को संक्रमित करना शुरू कर देंगे।

कार्डिनल एंजेलो डी डोनाटिस ने 900 चर्च बंद करने के आदेश दिए

CATHOLIC CHURCH AFTER CORONA

रोम की 900 से अधिक चर्चों का कामकाज देखने वाले कार्डिनल एंजेलो डी डोनाटिस के एक आदेश के बाद से सभी चर्चों पर ताला लगा दिया गया है। यह सब कोरोना वायरस को रोकने और अपने देश की मदद करने के लिए किया जा रहा है। कार्डिनल ने बाद में कहा कि प्रभु यीशू मानते थे कि जिस जगह दो तीन लोग बैठकर प्रभु का नाम लेते हैं वहां मैं खुद पहुंच जाता हूं।

पोप ने शुक्रवार को कहा था चर्चों को बंद कर दिया जाए

POP FRANCIS
वेटिकन में सेंट पीटर्स स्क्वेयर पर नहीं आए पोप फ्रांसिस। वीडियो से संदेश जारी किया।
corona virus khambra Church

पोप फ्रांसिस ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा कि बड़े बड़े फैसले कई बार गलत परिणाम दे जाते हैं। असल में पोप ने पिछले हफ्ते बयान जारी किया था कि चर्च के पादरियों को घरों से बाहर निकलकर मरीजों की सेवा करनी चाहिए। लेकिन अब पोप सभी चर्चों को बंद करने के आदेश दे चुके हैं। वह खुद अब लोगों के सामने नहीं आ रहे हैं। प्रवचन भी वीडियो काफ्रेंसिंग से ही कर रहे हैं। मगर सवाल वही उठता है कि भारत में चर्च बड़े बड़े समागमों पर नकेल क्यों नहीं कस रही।

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